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परचेज़ › सप्लायर का बिल जांचना

पेमेंट से पहले सप्लायर का जीएसटी बिल जांचना

ग़लत बिल दो बार नुकसान करता है: पैसा, और उस पर न मिलने वाला इनपुट टैक्स क्रेडिट। बिल आते ही दो मिनट की यह चेकलिस्ट बाद की लंबी भागदौड़ बचाती है।

टैक्स इनवॉइस पर क्या होना चाहिए (रूल 46)

बड़े सप्लायर: IRN और QR कोड

जिस सप्लायर का कुल टर्नओवर 2017-18 से किसी भी साल में ₹5 करोड़ से ऊपर गया हो, उसे हर बिज़नेस-टू-बिज़नेस इनवॉइस ई-इनवॉइस पोर्टल पर रजिस्टर करना होता है। ऐसे बिल पर IRN (64 अक्षर का नंबर) और QR कोड होता है। इनके बिना बिल सही टैक्स इनवॉइस नहीं है (रूल 48(5)), और उसका क्रेडिट ख़तरे में है। QR कोड किसी भी QR ऐप से स्कैन करें: उसमें GSTIN, बिल नंबर, तारीख़ और कीमत दिखती है, जो कागज़ से मेल खानी चाहिए।

और जल्दी वाली जांच

  1. हिसाब: मात्रा × रेट, डिस्काउंट, लिखे रेट पर टैक्स, राउंड ऑफ़।
  2. आपके ऑर्डर और मिले माल से: सही आइटम, सही मात्रा, कोई फ़ालतू लाइन नहीं।
  3. डुप्लीकेट: एक ही सप्लायर का एक ही बिल नंबर दो बार। यहां की परचेज़ बुक बताती है जब आप उस सप्लायर का पहले से सेव बिल नंबर दोबारा डालते हैं।
  4. रेट: जीएसटी रेट सितंबर 2025 में बदले (ज़्यादातर माल अब 5% या 18%, कुछ पर 40%)। बदलाव के बाद की तारीख़ का बिल पुराने रेट पर हो तो सप्लायर से बात करें।

बिल संभाल कर रखें

यहां बिल लिखते समय उसकी फोटो जोड़ें। फोटो छोटी करके इस ब्राउज़र में एंट्री के साथ रखी जाती है, और परचेज़ रजिस्टर से एक टैप में खुलती है। असली बिल भी (कागज़ या PDF) कानून के बताए 72 महीने तक रखें, और समय-समय पर अपने डेटा की बैकअप फाइल सेव करें।

सप्लायर के बिल एक बार लिखें, रजिस्टर हमेशा तैयार।परचेज़ बुक खोलें

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